Saturday, 9 September 2023

Vo Pyar Tha ya Kuch Aur Tha

सुबह का वक़्त... वह जागने के बाद बैठी हुई टी वी देख रही थी. मैंने किताबों का बैग ऊपर से उतार कर उसमें से किताबें निकाली, जिनका नाम था "पाकीज़ा आँचल". जितनी भी थी, ये सब. उन्हें लेकर वह अपनी मम्मी के पास गयी, जो उस वक़्त रोटी बना रहे थे. कहने लगी - "इतनी सारी है.." उसकी मम्मी ने देखा, कहा - "हाँ, इतनी तो बहोत है". मैं अंदर कमरे में आया, देखा उसका दुपट्टा रखा है. उसे उठा किचन में आया, द ोनों हाथों से उस दुपट्टे को थाम कहा - "एक पाकीज़ा आँचल और है". दुपट्टे को सामने करते हुए कहा "यह". कह कर पहले उसकी ओर देखा फिर उसकी मम्मी की ओर., उनके होंठ पहले धीरे से मुस्कान बन गये फिर आँखों से ख़ुशी झलक उठी. इधर उसके चेहरे पर कुछ-कुछ हैरत के भाव थे. मेरे हाथों से अपना दुपट्टा ले उसने उसे ओढ़ लिया. मेरा दिल कैसी अनजानी खुशी से सराबोर था वे शब्द कहते हुए.. मैंने महसूसा 'अपनी जिन्दगी के सब से अच्छे शब्द आज कहे है मैंने. न सिर्फ बल्कि दुनिया की सबसे अच्छी बात थी यह, जो मेरे होंठो से निकली. उसका दुपट्टा - पाकीज़ा आँचल. वह - "पाकीज़ा". #डायरी_के_पन्ने